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अगर वह क़ुरआन के पाठ को बाधित कर देता और फिर वापस आकर उसे पूरा करता है, तो क्या वह ‘अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम’ फिर से पढ़ेगाॽ

प्रश्न: 259660

अगर मुसहफ़ से क़ुरआन पढ़ते समय परिवार का कोई सदस्य मुझे बाधित कर देता है, तो क्या मुझे फिर से 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' पढ़ना होगा, या मुझे वहीं से क़ुरआन का पाठ जारी रखना चाहिए जहाँ मैंने छोड़ा थाॽ

उत्तर का सारांश

उत्तर का सारांश : जिस व्यक्ति ने किसी वैध कारण से क़ुरआन के पाठ को बाधित कर दिया, जैसे कि छींकना, या सलाम का जवाब देना, या किसी प्रश्नकर्ता का उत्तर देना … इत्यादि, और उसका इरादा यह है कि कारण के समाप्त होने के बाद क़ुरआन के पाठ को पूरा करेगा : तो उसका पहली बार ‘अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम’ पढ़ना पर्याप्त है, और उसे इसे दोहराने का आदेश नहीं दिया जाएगा, सिवाय इसके कि रुकावट लंबे समय तक हो, तो ऐसी स्थिति में वह इसे दोहराएगा।

अल्लाह की हमद, और रसूल अल्लाह और उनके परिवार पर सलाम और बरकत हो।

जिस व्यक्ति ने किसी वैध कारण से क़ुरआन के पाठ को बाधित कर दिया, जैसे कि छींकना, या सलाम का जवाब देना, या किसी प्रश्नकर्ता का उत्तर देना … इत्यादि, और उसका इरादा यह है कि कारण के समाप्त होने के बाद क़ुरआन के पाठ को पूरा करेगा : तो उसका पहली बार 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' (मैं शापित शैतान से अल्लाह की शरण चाहता हूँ) पढ़ना पर्याप्त है, और उसे इसे दोहराने का आदेश नहीं दिया जाएगा, सिवाय इसके कि रुकावट लंबे समय तक हो, तो ऐसी स्थिति में वह इसे दोहराएगा।

इब्ने मुफ़लेह ने “अल-आदाब अश-शरइय्यह” (2/326) में कहा :

“(क़ुरआन का) पाठ करने में 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' पढ़ना सुन्नत है।

यदि वह उसके पढ़ने के क्रम को त्यागने और छोड़ने के तौर पर इस इरादे से बंद कर देता है कि वह उसे फिर से शुरू नहीं करेगा : यदि वह उसे दोबारा पढ़ना चाहता है तो फिर से 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' पढ़ेगा।

और यदि वह उसे किसी वैध कारण से इस संकल्प के साथ स्थगित कर देता है कि वह कारण समाप्त हो जाने पर उसके पाठ को पूरा करेगा : तो उसके लिए पहली बार 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' पढ़ना पर्याप्त है।” उद्धरण समाप्त हुआ।

अर-रुहैबानी ने “मतालिब ऊलिन-नुहा फी शर्ह ग़ायतिल-मुंतहा” (1/599) में कहा :

“यदि वह (क़ुरआन के) पाठ को त्यागने और छोड़ने के इरादे से बंद कर देता है, फिर उसे दोबारा पढ़ना चाहता है : तो वह 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' को दोहराएगा।

और यदि वह किसी वैध कारण से इस संकल्प के साथ स्थगित कर देता है कि वह कारण समाप्त हो जाने पर उसके पाठ को पूरा करेगा, जैसे कि कोई चीज़ लेना या कुछ देना, या किसी प्रश्नकर्ता का उत्तर देना, या छींकना और इसी तरह के अन्य कारण : तो वह 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' को नहीं दोहराएगा; क्योंकि वह एक ही पठन है।” उद्धरण समाप्त हुआ।

यह इस स्थिति में है जब अंतराल लंबा न हो। यदि अंतराल लंबा हो जाए, तो उसके लिए 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' दोबारा पढ़ना सुन्नत है।

अज़-ज़रकशी रहिमहुल्लाह ने कहा :

“क़ुरआन पढ़ने से पहले 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' पढ़ना मुस्तहब है। फिर अगर वह दोबारा शुरू न करने के इरादे से पढ़ना बंद कर देता है, और बाद में वह फिर से पढ़ना चाहता है : तो वह 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' फिर से पढ़ेगा।

यदि वह इसे किसी वैध कारण से, दोबारा पढ़ने के संकल्प के साथ, स्थगित करता है : तो उसके लिए पहली बार 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' पढ़ना पर्याप्त है, जब तक कि अंतराल लंबा न हो।” “अल-बुरहान फी उलूमिल-क़ुरआन” (1/460) से उद्धरण समाप्त हुआ।     

नववी रहिमहुल्लाह ने “अल-मजमू'” (3/281) में कहा :

“उसके लिए एक बार 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' पढ़ना काफ़ी है, जब तक कि वह बातचीत या लंबे मौन के द्वारा अपने पाठ को बाधित नहीं करता है।

यदि वह इन दोनों में से किसी एक के साथ उसे बाधित कर देता है : तो वह 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' फिर से पढ़ेगा।

अगर वह तिलावत का सजदा करता है, और फिर पढ़ना जारी रखता है : तो वह फिर से 'अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम' नहीं पढ़ेगा, क्योंकि यह कोई अंतराल नहीं है, या यह एक किंचित् अंतराल है। इसे अल-मुतवल्ली ने उल्लेख किया है।” उद्धरण समाप्त हुआ।

लेकिन अगर वह उसे पढ़ने से संबंधित किसी कारण से बाधित करता देता है, जैसे कि कोई प्रश्न पूछना या वह जो आयतें पढ़ रहा है उनकी व्याख्या इत्यादि, तो वह उसे नहीं दोहराएगा।

इब्नुल-जज़री ने “अन-नश्र” (1/259) में कहा :

“यदि पाठक किसी कारण से अपने पठन को बाधित कर देता है, जैसे कि प्रार्थना (दुआ) करने के लिए रुकना, या वह जो पढ़ रहा है उससे संबंधित कोई बात कहना : तो वह इस्तिआज़ा ('अऊज़ो-बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम') को नहीं दोहराएगा।” उद्धरण समाप्त हुआ।

अगर वह अपने पाठ को ऐसी बात के द्वारा बाधित कर देता है जिसका पाठ से कोई संबंध नहीं है – जैसे कि किसी को सलाम करना – और फिर इस्तिआज़ा को दोहरा लेता है, तो यह अच्छा है।

नववी ने “अत-तिब्यान” (पृष्ठ 124) में कहा :

“यदि वह चलते-फिरते पढ़ रहा है, और कुछ लोगों के पास से गुज़रा : तो मुस्तहब है कि वह पाठ को रोक दे और उन्हें सलाम करे, फिर वापस क़ुरआन का पाठ करे। और अगर वह इस्तिआज़ा को दोहरा लेता है, तो अच्छा है।” उद्धरण समाप्त हुआ।

और अल्लाह तआला ही सबसे अधिक ज्ञान रखता है।

स्रोत

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