
वर्गीकरण
रोज़ों का क़ज़ा
- 3,999
रोज़ों की क़ज़ा को विलंब करने का कफ़्फ़ारा रिश्तेदारों को भुगतान करने का हुक्म
- 3,728
रमज़ान के छूटे हुए रोज़ों की क़ज़ा करने की नीयत से शक के दिन रोज़ा रखना
वह रात ही से रोज़े की नीयत किए बिना रमज़ान की क़ज़ा के रोज़े रखती थी, वह सुबह के समय रोज़े की नीयत करती थी, तो अब उसे क्या करना चाहिएॽ
सामान्य इमामों के निकाट, दिन में नीयत करके आपकी दोस्त का रमज़ान की क़ज़ा के रोज़े रखना मान्य नहीं है। अतः उसके लिए उन दिनों के रोज़ों को दोहराना ज़रूरी है, और उसपर कोई कफ़्फ़ारा अनिवार्य नहीं है। यह रखे हुए रोज़ों को दोहराने का हुक्म; अंतिम वर्ष की क़ज़ा के बारे में है, जिसका समय अभी बाक़ी है। जहाँ तक पिछले बीते हुए वर्षों की क़ज़ा का संबंध है, तो कुछ विद्वानों, जैसे कि शैखुल-इस्लाम इब्ने तैमिय्यह रहिमहुल्लाह, ने यह दृष्टिकोण अपनाया है कि जिस व्यक्ति ने कोई इबादत ग़लत ढंग से की और वह अज्ञानी था, और उसका समय निकल गया : तो उसके लिए उसे दोहराना अनिवार्य नहीं है। यदि आपकी दोस्त इस विचार को अपनाती है तो हम आशा करते हैं कि उसपर कोई पाप नहीं है।1,552- 1,743
उस आदमी का हुक्म जो रमज़ान की क़ज़ा भूल गया और दूसरा रमज़ान आ गया
- 3,385
जो व्यक्ति बिना किसी उज़्र के रमज़ान का रोज़ा न रखे अथवा बीच रमज़ान में जानबूझ कर रोज़ा तोड़ दे तो क्या उस पर क़ज़ा करना अनिवार्य है?
- 9,805
यदि शेष दिन पर्याप्त नहीं हैं तो क्या वह क़ज़ा करने से पहले शव्वाल के छ: रोज़े से शुरूआत करेगा ?
- 10,885
शव्वाल के छ: रोज़ों के साथ रमज़ान की क़ज़ा को एक ही नीयत में एकत्रित करना शुद्ध नहीं है
- 5,119
शव्वाल के महीने के दूसरे दिन रोज़ा रखना जायज़ है।
- 2,618
रोज़े के फ़िद्या में खाना खिलाने के बदले पैसा निकालना जायज़ नहीं है
- 2,198
जिस व्यक्ति पर रमज़ान के रोज़े हों, जिनकी संख्या उसे याद न हो