हम बस के द्वारा उम्रा के लिए गए, बस चालक को मीक़ात का ध्यान सौ किलो मीटर आगे निकल़ जाने के बाद आया, तो उसने उसकी तरफ वापस लौटने से इनकार कर दिया और यात्रा को जारी रखा यहाँ तक कि जद्दा पहुँच गया। तो ऐसी स्थिति में हमारे ऊपर क्या अनिवार्य है ॽ
हरप्रकार की प्रशंसाऔर गुणगान केवलअल्लाह के लिएयोग्य है।
“चालकके ऊपर अनिवार्यहै कि वह मीका़तके पास रूक जाएताकि लोग वहाँसे एहराम बांधें, यदिवह भूल गया और उसेसौ किलो मीटर गुज़रनेके बाद याद आयाजैसा कि प्रश्नकरने वाले का कहनाहै तो उसके ऊपरअनिवार्य यह हैकि वह लोगों कोलेकर वापस लौटआए ताकि वे मीक़ातसे एहराम बाँधसकें ; क्योंकिवह जानता है किये लोग उम्रा याहज्ज का इरादारखते हैं। यदिउसने ऐसा नहींकिया और उन्होंने अपने स्थानसे एहराम बाँधा, अर्थात्मीक़ात को पार करनेके सौ किलो मीटरके बाद, तो प्रत्येकव्यक्ति के ऊपरएक फिद्या अनिवार्यहै, जिसे वह मक्कामें क़ुर्बान करेगाऔर गरीबों मेंबांट देगा ; क्योंकिउन्हों ने उस इबादतके एक वाजिब कोछोड़ दिया चाहेवह हज्ज में होया उम्रा में।
औरइस स्थिति मेंयदि वे इस चालकको न्यायालय (अदालत)में लेकर जायेंतो अदालत उसकेऊपर उन्हों नेजो कुछ फिद्यादिया है उसकाभुगतान करनेका फैसला करेगी,क्योंकि वही उनकेजुर्माना देनेका कारण बना है, और यहमामला न्यायाधीशके विचार और फैसलेपर निर्भर करताहै क्योंकि उसकेलिए संभव है किचालक को उस फिद्याके मूल्य काभुगतान करनाअनिवार्य कर देजिसे इन लोगोंने दिया है ; क्योंकिउसने भूलकर उनकेहक़ में कोताहीसे काम लिया है, फिरउसने उन्हें एहरामके लिए लौटने केहक़ से वंचित करकेउनके ऊपर अति कियाहै।” अंत हुआ।
आदरणीयशैख मुहम्म बिनउसैमीन रहिमहुल्लाह।