मेरे पति का व्यापार में घाटा हो जाने के कारण, उनके ऊपर बैंकों और कुछ रिश्तेदारों का बहुत बड़ा क़र्ज़ है, और उन क़र्ज़ों के भुगतान में कई साल लगें गे। क्या हमारे लिए इस स्थिति में हज्ज या उम्रा के लिए जाना जाइज़ है ?
हर प्रकारकी प्रशंसा और गुणगान अल्लाह के लिए योग्य है।
हज्ज कीशर्तों में से एक शर्त सक्षमता है,और सक्षमता के अर्थ में आर्थिक रूप से सक्षम होना भीसम्मिलित है,और वह व्यक्ति जिसके ऊपर क़र्ज़ अनिवार्य है जिसका उस से मुतालबाकिया जा रहा है इस प्रकार कि ऋणदाता उस व्यक्ति को ऋण का भुगतान किए बिना हज्ज से रोकरहे हैं,तो ऐसीस्थिति में वह हज्ज नहीं करेगा। क्योंकि वह सक्षम नहीं है। और यदि वे उस से (क़र्ज़ का)मुतालबा न करें और उसे उनकी तरफ से सहनशीलता और नरमी का पता हो तो हज्ज करना जाइज़ हैऔर वह शुद्ध होगा। इसी प्रकार उस स्थिति में भी हज्ज करना जाइज़ है जबकि क़र्ज़ की चुकौतीका कोई विशेष समय निधार्रित न हो,और जब आसान हो उसे भुगतान करना हो। तथा हज्ज ऋण के भुगतानका एक अच्छा कारण भी हो सकता है। और अल्लाह तआला ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान रखता है।